जय मां जगदम्बे 🚩🙏 ⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️ हे माँ… 🛕 तेरा मन वह चौखट है, जहाँ ईर्ष्या शीश झुकाती है, जहाँ द्वेष की कड़वाहट भी मिश्री-सी घुल जाती है। 💞 न ऊँच-नीच की कोई दीवार, न छल का कोई घेरा है, तेरी हर सोच के पीछे बस सत्य का ही सवेरा है। 🚩 मंदिर के गर्भगृह में जैसे एक ज्योत अटल जलती रहती, वैसे ही तेरे आशीषों की, अविरल धारा बहती रहती। 🙏 जहाँ मौन स्वयं संगीत बने, पीड़ा शीतल चंदन है, ऐसे पावन अंतर्मन को मेरा सौ-सौ वंदन है। 🪈 जहां घृणा का शोर नहीं, करुणा की शहनाई है, तूने अपने भीतर ही तो अपनी मुक्ति पाई है। 🪨 गठरी जब अहंकार की, मिट्टी में मिल जाती है, अंतर्मन की मानवता, भीतर ही मुस्काती है। 🫧 तेरी देहरी पर आते ही, लोभ की आँधी थम जाती, क्षमा की शीतल छाया में, हर ज्वाला शांत हो जाती। 🕉️ जहाँ स्वार्थ का लेश नहीं, बस प्रेम का विस्तार है, हे माँ! तेरा हृदय ईश्वर का, सबसे अनुपम उपहार है। 🙏 शीश रखूँ जब गोद में तेरी, पीड़ा सब मिट जाती है, ममता भरी उस थपकी से, मीठी नींद आ जाती है। 🛕 नमन उस जननी को, जो त्याग की मूरत कहलाती है, धरा पर ईश्वर की झलक, केवल माँ में ही मिल पाती है। 🙏 🚩🪷 जय मां जगदम्बे 🪷🚩🙏