Safarnama रास्तों की खामोशी में मैंने अपनी ही आवाज़ सुनी। हर मोड़ ने मुझे थोड़ा खोया… थोड़ा पा लिया। धूप ने सिखाया सब्र, हवा ने दी आज़ादी, और रातों ने दिल की धड़कनों को कविता बना दिया। ये सफ़र… मंज़िल से ज़्यादा मेरी रूह को छू गया।